
हिटलर जिसका पुरा नाम एडोल्फ हिटलर था । हिटलर को बीसवीं सदी के सर्वाधिक घृणित, क्रूर और बदनाम शासक के तौर पर याद किया जाता है । इसके मुख्य कारण हिटलर में युद्ध की मानसिकता, जातिवाद, फासिस्टवादी विचारधारा का होना था। हिटलर का जन्म 20अप्रैल 1889 को ऑस्ट्रिया में हुआ । हिटलर के पिता अलाइस हिटलर की तीन शादीयाँ हुई थी । इनकी तीसरी पत्नी क्लारा थी इसने ही हिटलर को जन्म दिया । हिटलर ने प्राथमिक शिक्षा लिंज़ के रीयल स्कूल में प्राप्त किया । 3जनवरी 1903को हिटलर की पिता के मृत्यु के बाद हिटलर की माँ भी बीमारी से ग्रस्त हो गयी जिससे हिटलर अपने आपको कमजोर महसूस करनें लगा । १९०६ में हिटलर को पारिवारिक और शैक्षिक कारणों से वियना जाना पड़ा । पहली नज़र में वियना ने हिटलर को बहुत आकर्षित किया मगर वियना को जानने के बाद वियना के खोखले चकाचौन्ध से हिटलर को बहुत निराशा हुई । इसी कुछ महीनो के दरम्यान हिटलर का
सामना कुछ और निराशाओं से हुआ जैसे वियाना के फाईन आर्टस एकेडमी में दाखिला नही मिलना तथा २१ दिसम्बर १९०७ को उनकी माँ क्लारा की मृत्यु । हिटलर ने वियना में कुछ साल बुरे वक्त के गुजारे। हिटलर ने अपनी आत्मकथा "मेरा संघर्ष" में लिखा है - वियना मेरे लिए कठोर स्कूल जैसा था क्योकि यहाँ मै जिंदगी का महत्वपूर्ण सबक सीख पाया। यही मैंने अपनी सोंच और आदर्श की नींव रखी । हिटलर मौलिकता और क्रूरता को उद्येश्य प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण मानता था । हिटलर के दिल में यहूदियों के लिए नफ़रत भरी थी इसका कारण यह था कि हिटलर को लगने लगा कि जर्मन संस्कार और जर्मन आत्मविश्वास को यहूदी नुकसान पहुँचा रहा है, राजनीति और कारोबार में भी हिटलर को यहूदियों का ही वर्चस्व दिखता था । हिटलर की मनोदशा ऐसी हो गई की उसे लगने लगा कि जर्मनों के विनाश में यहूदियों का हाथ है । हिटलर ने ५ फ़रवरी १९१४ को सेना में नौकरी के लिए आवेदन दिया मगर शारिरीक रूप से कमजोर होने के कारण उसे सेना में भर्ती नही किया गया । फिर हिटलर ने लुडविग से लिखित निवेदन किया कि उसे स्वयं सेवी सेना में भर्ती कर लें यह निवेदन स्वीकार कर लिया गया । १९१४ में वीरता से लड़ने के लिए हिटलर को "आयरन क्रॉस"दिया गया । पहले लडाई में आयरन क्रॉस से सम्मानित होकर हिटलर गौरवान्वित महसूस कर रहा था पर जर्मनी की हार से वो बहुत दुखी था । हिटलर की सोच अब इतनी परिपक्व हो गई थी कि वो
इस युद्ध का विश्लेषण कर सके । हिटलर के विश्लेषण के आधार पर जर्मनी के हार के कुछ कारण - दुश्मन की कारगर रणनीति, आकाश से जर्मनी के विरुद्ध प्रचार और जर्मनी में हड़ताल था । २८ जून १९१९ को अमेरिका ,ब्रिटेन और फ्रांस के साथ जर्मनी ने एक संधि (वर्सायल की संधि) पर हस्ताक्षर किया इस संधि के अनुसार जर्मनी को युद्ध में जीते हुए सभी देश को आजाद करना पड़ा । जर्मनी पर यह प्रतिबन्ध लगा की वह एक लाख से ज्यादा सेना नही रख सकता और वह वायु सेना और जल सेना नही रखेगा । जर्मनी को युद्ध की क्षतिपूर्ति के लिए ६,५००,०००,००० पौंड ब्रिटेन मित्र देश को देना पड़ा । जर्मन वर्कर पार्टी से हिटलर का राजनितीक सफर शुरू हुआ । इस पार्टी में हिटलर को पहली बार एक सदस्य के तौर पर शामिल किया गया । मगर जल्दी लोगो को हिटलर एक मजबूत और एक सुलझे हुए व्यक्ति दि
खने लगा । इसके पीछे हिटलर का जोरदार भाषण काम आया। १ अप्रैल १९२० को हिटलर ने सेना को छोड़कर अपना पुरा वक्त इस पार्टी के कामो में लगा दिया। हिटलर देश की ताकत आम जनता को मानते थे ,ऊँचे तबके के लोगो को नही । हिटलर पार्टी का ज्यादा कार्यक्रम आम जनता के बीच ले गया और हिटलर को उसके भाषण शक्ति के कारण जनता से पुरा समर्थन मिलता । २९ जुलाई १९२१ को हिटलर पार्टी का चेयरमैन बनाया गया । वर्सायल संधि से बाद बहुत सेना बेरोजगार हो गए जिसे हिटलर ने अपने पार्टी में आने को कहा ।अब सेनाओ की भी राजनीति में अहम् भागीदारी होने लगी । नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी के दो विभागों नाजी जिम्नास्टिक और स्पोर्ट्स डिविजन का निर्माण सैनिको से ही किया गया । फिर इनको एक साथ मिलाकर एस ए का निर्माण किया गया । अब
वो वक्त आ गया था जब लोग हिटलर से खौफजदा रहने लगे थे । १९२२ में हिटलर ने पुलिस से बिना खौफ खाए ८०० लड़को के साथ कम्युनिस्टो तथा समाजवादियों से लडाई लड़ी वो भी बीच सड़को पर । इसे वीरता प्रदर्शन समझा गया और इसकी चर्चा पुरे जर्मनी में फैल गई । हिटलर की नाजी पार्टी चर्चित हो रही थी अब नाजी पार्टी का विस्तार बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा था । इसी दरम्यान हिटलर ने तूफानी सेना से साथ हिंसात्मक रूप से राष्ट्रीय क्रांति की घोषणा की जिस कारण हिटलर को गिरफ्तार किया गया और ५ साल कैद की सजा सुनाई गई । जेल में ही हिटलर ने अपनी आत्मकथा "मेरा संघर्ष " लिखा । जेल से बाहर आने के बाद हिटलर फिर से अपने मकसद में जुट गया । हिटलर अब एक कुशल रा
जनीतिज्ञ हो गया था । हिटलर ने तूफानी सेना को बढ़ाना शुरू कर दिया । सरकार हिटलर के तूफानी सेना पर पाबंदी भी नही लगा सकती थी इससे देश में बेरोजगारी और अराजकता फ़ैल जाती । १९३२ के चुनाव में नाजी पार्टी को कुल ६०८ में सिर्फ़ २३० सीट ही मिली । ३० मई १९३२ को ब्रुनिंग के चांसलर पद से इस्तीफा देने के बाद २ दिसम्बर को शिलीसर जर्मनी का चांसलर बना । ३० जनवरी १९९३३ को राजनितीक और कुछ अन्य समस्याओ से बचने के लिए हिटलर को जर्मनी का चांसलर बनाया गया । जर्मनी का चांसलर बनते ही हिटलर ने जर्मन रिपब्किक को अगस्त १९३४ तक समाप्त कर दिया और जर्मनी को एक महाशक्ति बनाने के लिए वर्सायल की संधि की अवहेलना शुरू कर दी। २३ सितम्बर १९३६ को हिटलर ने मुसोलिनी को जर्मनी आने के
लिए निमंत्रण पत्र भेजा मुसोलिनी ने इस निमंत्रण को मानते हुए जर्मनी पहुंचे। मुसोलिनी हिटलर से बहुत प्रभावित हुआ। जापान भी जर्मनी से प्रभावित था अंततः तीनो के बीच समझौता होने के बाद हिटलर अपने आप को विश्व की सबसे बड़ी ताकत के तौर पर आंकने लगा था। जर्मनी के पास आर्मी, वायु सेना और जल सेना बहुत बड़ी संख्या में इकठ्ठा हो गया था और अत्याधुनिक हथियार की भी कोई कमी नही थी। अतः उसने जर्मन साम्राज्य को बढ़ने के लिए युद्ध की घोषणा कर दी । सबसे पहले हिटलर ने अपने कूटनीतिक ज्ञान का परिचय देते हुए आस्ट्रिया और चेकोस्लोवाकिया को जर्मनी में मिला लिया। २१ मई १९३९ को बर्लिन में जर्मनी, इटली और जापान के बीच युद्ध के लिए मित्रता -संधि हुआ। ब्रिटेन और अमेरिका के विरोध के वावजूद हिटलर ने १ सितम्बर १९३९ को हिटलर ने पोलैंड पर आक्रमण कर दिया। ३ सितम्बर १९३
९ को ब्रिटेन और फ्रांस भी पोलैंड के साथ युद्ध में शामिल हो गया यही से द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई ।
अंततः युद्ध में पोलैंड की हार हुई। २४ अक्टूबर १९३९ को रूस और जर्मनी के बीच एक समझौता हुआ इस समझौते के अनुसार रूस और जर्मनी एक दुसरे के विरुद्ध युद्ध नही कर सकता था। अब हिटलर बेल्जियम और हॉलैंड को जर्मनी में मिलाना चाहता था मगर मुसोलिनी ने इस युद्ध के प्रति अपना विरोध जताया मगर हिटलर पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ा युद्ध को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया। इस संधि से हिटलर का मनोबल बहुत बढ़ गया । दिसम्बर १९३९ में फिनलैंड को रूस के आक्रमण का शिकार होना पड़ा। ब्रिटेन और फ्रांस फिनलैंड को मदद के लिया नौसेना भेज सकते थे जिस कारण नार्वे का महत्व काफी बढ़ गया अतः हिटलर ने नोर्वे और डेनमार्क को अपने अधिकार में लेने की योजना बनायी मगर फ्रांस और ब्रिटेन भी यहाँ अपना अ
धिकार जमाना चाहते थे। अतः ब्रिटिश नौसेना ने हिटलर से पहले ही नार्वे पर आक्रमण कर दिया जिससे हिटलर की योजना सफल नही हो सकी और हिटलर गुस्से में आकर पश्चिमी देशो को ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी।
१० मई १९४० को हिटलर ने फ्रांस पर हमला पर हमला कराने के लिए पूरी ताकत लगा दी पर हिटलर को ऐसा लगने लगा की वह फ्रांस और ब्रिटेन के सेना को पराजित नही कर सकता तब हिटलर ने मुसोलिनी से मदद मांगी। ५ जून १९४० को मुसोलिनी हिटलर की मदद के लिए पहुँच गया। और दोनों ने कुशल रणनीति के संग तब तक युद्ध किया, जब तक फ्रांस ने हार नही मान लिया। और १४ जून १९४० को फ्रांस ने अपने हार की औपचारिक घोषणा कर दी। २२ जून १९४१ को हिटलर ने संधि (एक-दुसरे पर आक्रमण नही करने की , २४ अक्टूबर १९३९) की अवहेलना करते हुए रू
स पर हमला कर दिया। जर्मन सैनिक क्रूरता से लड़ते हुए रूसी सैनिको को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया, और १४ अक्टूबर के आस-पास जर्मन फौज मोज्हेस्क जो रूस की राजधानी मास्को से सिर्फ़ ८५ मील दूर स्थित है, पहुँच गया। अब तक इतने रुसी बंधक बना लिए गए थे कि गोरिंग ने कहा था कि ५० लाख से ज्यादा सैनिक इस सर्दी में भूख से मारे जाएँगे। जर्मन सैनिको के मास्को के बहुत निकट आ जाने के कारण रूस में अमेरिका और ब्रिटेन से मदद की गुहार लगायी परन्तु दोनों ने मदद करने से इनकार कर दिया। लेकिन ९ दिसम्बर १९४१ को जापान का अमेरिका पर हमला कराने के पश्चात् अमेरिका ने जापान और उनके मित्र राष्ट्रों के खिलाफ जंग की घोषणा कर दी। "जापान ने ९ दिसम्बर को हमला करके अमेरिका का नौ सैनिक अड्डा ,१८८ हवाईजहाज, २२ लड़ाकू जहाज नष्ट कर दिया।
अमेरिका और ब्रिटेन अब रूस के साथ थे, रूस के आम नागरिक भी युद्ध
में कूद चुके थे।
जिसका परिणाम यह हुआ कि जर्मनी और मित्र राष्ट्र कमजोर पड़ने लगा और उसने १९४२ में आत्मसमर्पण कर दिया । मुसोलिनी भी १९४३ में अमरीका और जर्मनी से परस्त हो गया यही वो वक्त था जब हिटलर पंगु होने लगा था। १२ जनवरी १९४५ को रूस ने पोलैंड से जर्मन को हटाना शुरू कर दिया, मुसोलिनी का इटली में गिरफ्तार हो जाने के कारण तथा जापान की भी युद्ध में व्यस्तता के कारण अब हिटलर को कही से भी मदद नही मिल सकती थी अतः हिटलर भी समझ गया था कि लड़ाई ज्यादा दिनों तक नही चलेगी। पोलैंड पर जीत हासिल करने के पश्चात् रुसी सेना आर्डर पहुँच गई फिर जर्मन तथा रूसी सेनाओं के बीच जंग शुरू हो गया तभी अमेरिका और ब्रिटेन पश्चिमी सीमओं को तोड़ते हुए राइनालैंड में प्रवेश कर गया। जर्मन सेनाओ को २१ दिनों के बाद पश्चिम सीमओं से पीछे हटना पड़ा । अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाए ११ अप्रैल को एलबी पहुँच गई और रुसी सेना ९ अप्रैल को
प्रुसिया,१३ अप्रैल को वियना और १६ अप्रैल को आर्डर पर कब्ज़ा करते हुए बर्लिन की तरफ़ बढ़ने लगा। हिटलर का कोई भी रणनीति काम नही कर रहा था। २० अप्रैल को रुसी सैनिक बर्लिन पहुँच गया अब पुरा बर्लिन युद्ध के मैदान में परिवर्तित हो चुका था। चारो ओर गोले बरसाए जा रहे थे, चीख पुकार से पुरा बर्लिन थर्रा रहा था , पुरा बर्लिन कब्रगाह में तब्दील हो चुका था, अब इंसान के रोने की नही तोप् से निकली गोले की आवाज़ सुने दे रही थी। २२ अप्रैल तक नरसंहार होने के बाद रूस और मित्र राष्ट्र के सैनिक चांसलरी की तरफ़ बढ़ने लगी जो हिटलर का तात्कालिक निवास था, अब गोले चांसलरी के खिड़की और छत से टकराने लगी थी, हिटलर कुछ दिनों तक चांसलरी के बंकर में छुपे रहे ताकि वह हवाई हमलो से सुरक्षित रह सके।
अब जर्मनी की हार निश्चित हो गई थी। हिटलर भी अब हार महसूस कराने लगा था । ३० अप्रैल १९४५ को दोपहर ३:३० बजे खौफ का पर्यायवाची बन चुका वो शख्स जिसके नाम से दुनिया दहल जाती थी उसने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। शायद हिटलर को अपनी हार देखना पसंद नही था अब आप ही सोचिये हिटलर क्या था? एक क्रूर शासक, कूटनीतिज्ञ, सनकी, देशभक्त या.....? आप हिटलर को कैसे आंकते है ?
सामना कुछ और निराशाओं से हुआ जैसे वियाना के फाईन आर्टस एकेडमी में दाखिला नही मिलना तथा २१ दिसम्बर १९०७ को उनकी माँ क्लारा की मृत्यु । हिटलर ने वियना में कुछ साल बुरे वक्त के गुजारे। हिटलर ने अपनी आत्मकथा "मेरा संघर्ष" में लिखा है - वियना मेरे लिए कठोर स्कूल जैसा था क्योकि यहाँ मै जिंदगी का महत्वपूर्ण सबक सीख पाया। यही मैंने अपनी सोंच और आदर्श की नींव रखी । हिटलर मौलिकता और क्रूरता को उद्येश्य प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण मानता था । हिटलर के दिल में यहूदियों के लिए नफ़रत भरी थी इसका कारण यह था कि हिटलर को लगने लगा कि जर्मन संस्कार और जर्मन आत्मविश्वास को यहूदी नुकसान पहुँचा रहा है, राजनीति और कारोबार में भी हिटलर को यहूदियों का ही वर्चस्व दिखता था । हिटलर की मनोदशा ऐसी हो गई की उसे लगने लगा कि जर्मनों के विनाश में यहूदियों का हाथ है । हिटलर ने ५ फ़रवरी १९१४ को सेना में नौकरी के लिए आवेदन दिया मगर शारिरीक रूप से कमजोर होने के कारण उसे सेना में भर्ती नही किया गया । फिर हिटलर ने लुडविग से लिखित निवेदन किया कि उसे स्वयं सेवी सेना में भर्ती कर लें यह निवेदन स्वीकार कर लिया गया । १९१४ में वीरता से लड़ने के लिए हिटलर को "आयरन क्रॉस"दिया गया । पहले लडाई में आयरन क्रॉस से सम्मानित होकर हिटलर गौरवान्वित महसूस कर रहा था पर जर्मनी की हार से वो बहुत दुखी था । हिटलर की सोच अब इतनी परिपक्व हो गई थी कि वो
इस युद्ध का विश्लेषण कर सके । हिटलर के विश्लेषण के आधार पर जर्मनी के हार के कुछ कारण - दुश्मन की कारगर रणनीति, आकाश से जर्मनी के विरुद्ध प्रचार और जर्मनी में हड़ताल था । २८ जून १९१९ को अमेरिका ,ब्रिटेन और फ्रांस के साथ जर्मनी ने एक संधि (वर्सायल की संधि) पर हस्ताक्षर किया इस संधि के अनुसार जर्मनी को युद्ध में जीते हुए सभी देश को आजाद करना पड़ा । जर्मनी पर यह प्रतिबन्ध लगा की वह एक लाख से ज्यादा सेना नही रख सकता और वह वायु सेना और जल सेना नही रखेगा । जर्मनी को युद्ध की क्षतिपूर्ति के लिए ६,५००,०००,००० पौंड ब्रिटेन मित्र देश को देना पड़ा । जर्मन वर्कर पार्टी से हिटलर का राजनितीक सफर शुरू हुआ । इस पार्टी में हिटलर को पहली बार एक सदस्य के तौर पर शामिल किया गया । मगर जल्दी लोगो को हिटलर एक मजबूत और एक सुलझे हुए व्यक्ति दि
खने लगा । इसके पीछे हिटलर का जोरदार भाषण काम आया। १ अप्रैल १९२० को हिटलर ने सेना को छोड़कर अपना पुरा वक्त इस पार्टी के कामो में लगा दिया। हिटलर देश की ताकत आम जनता को मानते थे ,ऊँचे तबके के लोगो को नही । हिटलर पार्टी का ज्यादा कार्यक्रम आम जनता के बीच ले गया और हिटलर को उसके भाषण शक्ति के कारण जनता से पुरा समर्थन मिलता । २९ जुलाई १९२१ को हिटलर पार्टी का चेयरमैन बनाया गया । वर्सायल संधि से बाद बहुत सेना बेरोजगार हो गए जिसे हिटलर ने अपने पार्टी में आने को कहा ।अब सेनाओ की भी राजनीति में अहम् भागीदारी होने लगी । नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी के दो विभागों नाजी जिम्नास्टिक और स्पोर्ट्स डिविजन का निर्माण सैनिको से ही किया गया । फिर इनको एक साथ मिलाकर एस ए का निर्माण किया गया । अब
वो वक्त आ गया था जब लोग हिटलर से खौफजदा रहने लगे थे । १९२२ में हिटलर ने पुलिस से बिना खौफ खाए ८०० लड़को के साथ कम्युनिस्टो तथा समाजवादियों से लडाई लड़ी वो भी बीच सड़को पर । इसे वीरता प्रदर्शन समझा गया और इसकी चर्चा पुरे जर्मनी में फैल गई । हिटलर की नाजी पार्टी चर्चित हो रही थी अब नाजी पार्टी का विस्तार बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा था । इसी दरम्यान हिटलर ने तूफानी सेना से साथ हिंसात्मक रूप से राष्ट्रीय क्रांति की घोषणा की जिस कारण हिटलर को गिरफ्तार किया गया और ५ साल कैद की सजा सुनाई गई । जेल में ही हिटलर ने अपनी आत्मकथा "मेरा संघर्ष " लिखा । जेल से बाहर आने के बाद हिटलर फिर से अपने मकसद में जुट गया । हिटलर अब एक कुशल रा
जनीतिज्ञ हो गया था । हिटलर ने तूफानी सेना को बढ़ाना शुरू कर दिया । सरकार हिटलर के तूफानी सेना पर पाबंदी भी नही लगा सकती थी इससे देश में बेरोजगारी और अराजकता फ़ैल जाती । १९३२ के चुनाव में नाजी पार्टी को कुल ६०८ में सिर्फ़ २३० सीट ही मिली । ३० मई १९३२ को ब्रुनिंग के चांसलर पद से इस्तीफा देने के बाद २ दिसम्बर को शिलीसर जर्मनी का चांसलर बना । ३० जनवरी १९९३३ को राजनितीक और कुछ अन्य समस्याओ से बचने के लिए हिटलर को जर्मनी का चांसलर बनाया गया । जर्मनी का चांसलर बनते ही हिटलर ने जर्मन रिपब्किक को अगस्त १९३४ तक समाप्त कर दिया और जर्मनी को एक महाशक्ति बनाने के लिए वर्सायल की संधि की अवहेलना शुरू कर दी। २३ सितम्बर १९३६ को हिटलर ने मुसोलिनी को जर्मनी आने के
लिए निमंत्रण पत्र भेजा मुसोलिनी ने इस निमंत्रण को मानते हुए जर्मनी पहुंचे। मुसोलिनी हिटलर से बहुत प्रभावित हुआ। जापान भी जर्मनी से प्रभावित था अंततः तीनो के बीच समझौता होने के बाद हिटलर अपने आप को विश्व की सबसे बड़ी ताकत के तौर पर आंकने लगा था। जर्मनी के पास आर्मी, वायु सेना और जल सेना बहुत बड़ी संख्या में इकठ्ठा हो गया था और अत्याधुनिक हथियार की भी कोई कमी नही थी। अतः उसने जर्मन साम्राज्य को बढ़ने के लिए युद्ध की घोषणा कर दी । सबसे पहले हिटलर ने अपने कूटनीतिक ज्ञान का परिचय देते हुए आस्ट्रिया और चेकोस्लोवाकिया को जर्मनी में मिला लिया। २१ मई १९३९ को बर्लिन में जर्मनी, इटली और जापान के बीच युद्ध के लिए मित्रता -संधि हुआ। ब्रिटेन और अमेरिका के विरोध के वावजूद हिटलर ने १ सितम्बर १९३९ को हिटलर ने पोलैंड पर आक्रमण कर दिया। ३ सितम्बर १९३
९ को ब्रिटेन और फ्रांस भी पोलैंड के साथ युद्ध में शामिल हो गया यही से द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई ।अंततः युद्ध में पोलैंड की हार हुई। २४ अक्टूबर १९३९ को रूस और जर्मनी के बीच एक समझौता हुआ इस समझौते के अनुसार रूस और जर्मनी एक दुसरे के विरुद्ध युद्ध नही कर सकता था। अब हिटलर बेल्जियम और हॉलैंड को जर्मनी में मिलाना चाहता था मगर मुसोलिनी ने इस युद्ध के प्रति अपना विरोध जताया मगर हिटलर पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ा युद्ध को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया। इस संधि से हिटलर का मनोबल बहुत बढ़ गया । दिसम्बर १९३९ में फिनलैंड को रूस के आक्रमण का शिकार होना पड़ा। ब्रिटेन और फ्रांस फिनलैंड को मदद के लिया नौसेना भेज सकते थे जिस कारण नार्वे का महत्व काफी बढ़ गया अतः हिटलर ने नोर्वे और डेनमार्क को अपने अधिकार में लेने की योजना बनायी मगर फ्रांस और ब्रिटेन भी यहाँ अपना अ
धिकार जमाना चाहते थे। अतः ब्रिटिश नौसेना ने हिटलर से पहले ही नार्वे पर आक्रमण कर दिया जिससे हिटलर की योजना सफल नही हो सकी और हिटलर गुस्से में आकर पश्चिमी देशो को ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी।१० मई १९४० को हिटलर ने फ्रांस पर हमला पर हमला कराने के लिए पूरी ताकत लगा दी पर हिटलर को ऐसा लगने लगा की वह फ्रांस और ब्रिटेन के सेना को पराजित नही कर सकता तब हिटलर ने मुसोलिनी से मदद मांगी। ५ जून १९४० को मुसोलिनी हिटलर की मदद के लिए पहुँच गया। और दोनों ने कुशल रणनीति के संग तब तक युद्ध किया, जब तक फ्रांस ने हार नही मान लिया। और १४ जून १९४० को फ्रांस ने अपने हार की औपचारिक घोषणा कर दी। २२ जून १९४१ को हिटलर ने संधि (एक-दुसरे पर आक्रमण नही करने की , २४ अक्टूबर १९३९) की अवहेलना करते हुए रू
स पर हमला कर दिया। जर्मन सैनिक क्रूरता से लड़ते हुए रूसी सैनिको को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया, और १४ अक्टूबर के आस-पास जर्मन फौज मोज्हेस्क जो रूस की राजधानी मास्को से सिर्फ़ ८५ मील दूर स्थित है, पहुँच गया। अब तक इतने रुसी बंधक बना लिए गए थे कि गोरिंग ने कहा था कि ५० लाख से ज्यादा सैनिक इस सर्दी में भूख से मारे जाएँगे। जर्मन सैनिको के मास्को के बहुत निकट आ जाने के कारण रूस में अमेरिका और ब्रिटेन से मदद की गुहार लगायी परन्तु दोनों ने मदद करने से इनकार कर दिया। लेकिन ९ दिसम्बर १९४१ को जापान का अमेरिका पर हमला कराने के पश्चात् अमेरिका ने जापान और उनके मित्र राष्ट्रों के खिलाफ जंग की घोषणा कर दी। "जापान ने ९ दिसम्बर को हमला करके अमेरिका का नौ सैनिक अड्डा ,१८८ हवाईजहाज, २२ लड़ाकू जहाज नष्ट कर दिया।अमेरिका और ब्रिटेन अब रूस के साथ थे, रूस के आम नागरिक भी युद्ध
में कूद चुके थे।जिसका परिणाम यह हुआ कि जर्मनी और मित्र राष्ट्र कमजोर पड़ने लगा और उसने १९४२ में आत्मसमर्पण कर दिया । मुसोलिनी भी १९४३ में अमरीका और जर्मनी से परस्त हो गया यही वो वक्त था जब हिटलर पंगु होने लगा था। १२ जनवरी १९४५ को रूस ने पोलैंड से जर्मन को हटाना शुरू कर दिया, मुसोलिनी का इटली में गिरफ्तार हो जाने के कारण तथा जापान की भी युद्ध में व्यस्तता के कारण अब हिटलर को कही से भी मदद नही मिल सकती थी अतः हिटलर भी समझ गया था कि लड़ाई ज्यादा दिनों तक नही चलेगी। पोलैंड पर जीत हासिल करने के पश्चात् रुसी सेना आर्डर पहुँच गई फिर जर्मन तथा रूसी सेनाओं के बीच जंग शुरू हो गया तभी अमेरिका और ब्रिटेन पश्चिमी सीमओं को तोड़ते हुए राइनालैंड में प्रवेश कर गया। जर्मन सेनाओ को २१ दिनों के बाद पश्चिम सीमओं से पीछे हटना पड़ा । अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाए ११ अप्रैल को एलबी पहुँच गई और रुसी सेना ९ अप्रैल को
प्रुसिया,१३ अप्रैल को वियना और १६ अप्रैल को आर्डर पर कब्ज़ा करते हुए बर्लिन की तरफ़ बढ़ने लगा। हिटलर का कोई भी रणनीति काम नही कर रहा था। २० अप्रैल को रुसी सैनिक बर्लिन पहुँच गया अब पुरा बर्लिन युद्ध के मैदान में परिवर्तित हो चुका था। चारो ओर गोले बरसाए जा रहे थे, चीख पुकार से पुरा बर्लिन थर्रा रहा था , पुरा बर्लिन कब्रगाह में तब्दील हो चुका था, अब इंसान के रोने की नही तोप् से निकली गोले की आवाज़ सुने दे रही थी। २२ अप्रैल तक नरसंहार होने के बाद रूस और मित्र राष्ट्र के सैनिक चांसलरी की तरफ़ बढ़ने लगी जो हिटलर का तात्कालिक निवास था, अब गोले चांसलरी के खिड़की और छत से टकराने लगी थी, हिटलर कुछ दिनों तक चांसलरी के बंकर में छुपे रहे ताकि वह हवाई हमलो से सुरक्षित रह सके।अब जर्मनी की हार निश्चित हो गई थी। हिटलर भी अब हार महसूस कराने लगा था । ३० अप्रैल १९४५ को दोपहर ३:३० बजे खौफ का पर्यायवाची बन चुका वो शख्स जिसके नाम से दुनिया दहल जाती थी उसने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। शायद हिटलर को अपनी हार देखना पसंद नही था अब आप ही सोचिये हिटलर क्या था? एक क्रूर शासक, कूटनीतिज्ञ, सनकी, देशभक्त या.....? आप हिटलर को कैसे आंकते है ?
आप अपने आलोचना और टिपण्णी से हमें अवगत कराये।